वर्ष भर के पर्व
पर्व, ग्रहण और विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले मंदिर में पुष्टि कर लें।
- मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण अष्टमी, नवंबर या दिसंबर
भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती)
काल भैरव का प्राकट्य दिवस और मंदिर का सबसे बड़ा पर्व। बाबा का पंचामृत स्नान और विशेष श्रृंगार होता है और श्रद्धालु दिनभर तेल चढ़ाते हैं। कुछ वर्षों तक बाबा के जन्मोत्सव पर बहुत बड़ा केक काटा जाता था (2018 में 601 किलो); दिसंबर 2024 की समाचार रिपोर्टों के अनुसार केक काटना बंद कर दिया गया है। बाकी हर महीने की कृष्ण अष्टमी कालाष्टमी के रूप में मनाई जाती है।
- कोई एक निश्चित तिथि पुष्ट नहीं हुई; भैरव अष्टमी, रविवार और मंगलवार इसके प्रिय दिन हैं
अष्ट भैरव यात्रा
काशी की रक्षा करने वाले आठ भैरवों की यात्रा: हनुमान घाट पर रुरु, दुर्गाकुंड पर चंड, मृत्युंजय महादेव के पास असितांग, लाट भैरव में कपाली, कमच्छा में क्रोधन, उन्मत्त, भूत भैरव में भीषण और गायघाट पर संहार भैरव। यात्रा का समापन कोतवाल काल भैरव के दर्शन से होता है।
- वर्ष में एक बार, शीत ऋतु में; 2025 में 26 दिसंबर को
वार्षिक श्रृंगार एवं अन्नकूट
बाबा को विशेष वस्त्र धारण कराए जाते हैं और छप्पन प्रकार का भोग लगता है, जिसमें फल, मिठाई और मदिरा भी शामिल रहती है। आरती के बाद पट खुलते हैं और देर रात तक दर्शन चलते हैं। रुद्राक्ष श्रृंगार भी मंदिर के वार्षिक आयोजनों में गिना जाता है।
- फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, फरवरी या मार्च
महाशिवरात्रि
शिव की इस महारात्रि पर काशी में अपार भीड़ उमड़ती है और विश्वनाथ के दर्शन को आए अधिकतर श्रद्धालु कोतवाल के दरबार भी पहुँचते हैं। गलियों में बहुत लंबी कतारों के लिए तैयार रहें।
- आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, रथयात्रा मेले का पहला दिन, जून या जुलाई
बाबा काल भैरव का नगर भ्रमण
बाबा की पंचमुखी स्वर्ण-रजत प्रतिमा बैंड, ढोल और झाँकियों के साथ पुराने नगर में शोभायात्रा के रूप में निकलती है। 2026 में यह चौखंभा से विश्वेश्वरगंज, मैदागिन और चौक होते हुए भैरोनाथ चौराहे तक गई। शोभायात्रा का आयोजन एक स्थानीय समाज की समिति करती है।